इम्प्लाइड ऑड्स: वे चिप्स जो अभी पॉट में नहीं हैं
स्तर 4 · सबक़ 7 / 85 मिनट में पढ़ें
महँगे प्राइस पर भी कॉल कहाँ से बनता है
पॉट6,000
बेट1,500




डेक में दो सिक्स बचे हैं। आउट्स की गिनती रिवर तक सेट को ~8% पर लाकर छोड़ देती है, और इधर पॉट जो प्राइस (क़ीमत) दे रहा है, वह इससे ऊँचा बैठता है:
~8% इक्विटी बनाम ~17% प्राइस
पॉट में पड़ी चिप्स इस कॉल का बोझ नहीं उठातीं। जो उठाती हैं, वे इस वक़्त सामने वाले के स्टैक में हैं। इम्प्लाइड ऑड्स वही चिप्स हैं जो तीसरा सिक्स आ जाने पर टर्न और रिवर पर उस स्टैक से खिंचकर आपके पास आएँगी — और फ़ैसले के वक़्त वे मेज़ पर कहीं दिख भी नहीं रहीं।
सेट माइनिंग इसी सोच की सबसे साफ़ शक्ल है। इतना कम बनने वाला हैंड इसलिए नहीं खेला जाता कि सामने कितना पड़ा है, बल्कि इसलिए कि जिन गिने-चुने फ़्लॉप पर वह बन जाता है, वहाँ कितना कमाता है।
ये तीन बातें सच हों, तभी यह गिनती चलती है
इनमें से एक भी टूटी, तो पूरी दलील वहीं बैठ जाती है।
- आपका हैंड छुपा हो। दो सिक्स किसी के अंदाज़े में नहीं आते, इसलिए किंग पकड़े बैठा खिलाड़ी बेट पर बेट करता रहता है। बोर्ड पर तीसरा हार्ट सबको दिखता है, और जिस ड्रॉ के आने की ख़बर पूरी मेज़ को हो, उसे आगे की स्ट्रीट पर बहुत कम चिप्स मिलती हैं।
- पीछे चिप्स बची हों। आगे कितना जीता जा सकता है, इसकी हद दोनों स्टैक में जो छोटा है वही तय करता है। सामने वाले के पास एक ही बेट बची हो तो आगे से कुछ आना ही नहीं है, और छोटे स्टैक के सामने नज़दीकी ड्रॉ सीधे फ़ोल्ड बन जाते हैं।
- सामने वाला देता भी हो। कुछ खिलाड़ी डराने वाला कार्ड गिरते ही चेक करके हट जाते हैं। उनके सामने आगे वाली चिप्स कभी आती ही नहीं, और कॉल को अकेले प्राइस के दम पर खड़ा होना पड़ता है।








टर्न पर आगे की चिप्स इतनी कम क्यों रह जाती हैं
पॉट12
बेट3





फ़्लॉप पर बैठे फ़्लश ड्रॉ के आगे टर्न और रिवर, दोनों बाक़ी होते हैं। यहाँ सिर्फ़ रिवर बचा है, इसलिए आगे की पूरी उम्मीद एक बेट पर सिमट गई है।
यही वजह है कि टर्न का कॉल सबसे पहले प्राइस पर टिकना चाहिए। यह बेट इतनी छोटी है कि अकेला पॉट इसे संभाल लेता है — यह पूरी तुलना इक्विटी बनाम पॉट ऑड्स में चलती है। इम्प्लाइड ऑड्स उसके ऊपर की गुंजाइश हैं, कॉल की वजह नहीं।
टर्न पर बेट बड़ी आ जाए तो कुछ भी इसे नहीं बचाता। एक रिवर बेट उस फ़ासले की भरपाई नहीं कर सकती जो पॉट और प्राइस के बीच खुला रह गया हो।
और रिवर पर हार्ट आया तो बोर्ड पर तीन हार्ट दिखने लगेंगे। सामने वाला भी उन्हें उतनी ही आसानी से गिन लेता है, इसलिए जो हैंड आपको चिप्स देने वाला था, वह अक्सर चेक करके रुक जाता है।
ख़ुद को परखें
टर्न पर फ़्लश ड्रॉ के साथ आप कॉल करते हैं, इस उम्मीद पर कि हार्ट आते ही चिप्स मिलेंगी। यह उम्मीद ज़्यादा से ज़्यादा कितनी बेट जुटा सकती है?
रिवर्स इम्प्लाइड ऑड्स: जिस कार्ड का इंतज़ार था, वही भारी पड़ जाए
कुछ हैंड सबसे ज़्यादा चिप्स ठीक उसी कार्ड पर गँवाते हैं जिसका वे इंतज़ार कर रहे थे।









रिवर्स इम्प्लाइड ऑड्स वे चिप्स हैं जो हैंड बन जाने के बाद भी आपको आगे देनी पड़ती हैं, क्योंकि बना हुआ हैंड दूसरे नंबर पर बैठा है। क्वीन-हाई फ़्लश चूके हुए ड्रॉ से एक चिप नहीं लेती और ऐस वाली फ़्लश को सब कुछ दे देती है।
जिस ड्रॉ की एक बेहतर शक्ल किसी और के पास हो सकती है, उसे उतना ही घटाकर तौलिए — छोटी फ़्लश, स्ट्रेट का निचला सिरा, कमज़ोर किकर वाला पेयर। अकेला प्राइस जितनी देर टिकने की इजाज़त देता है, ऐसे हैंड उससे पहले छोड़ने पड़ते हैं; फ़ोल्ड कब करें पूरा इसी पर है। यहाँ का कोई शब्द नया लगे तो शुरुआती खिलाड़ियों के लिए पोकर शब्द में देख लीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या इनका कोई पक्का नंबर निकाला जा सकता है?
नहीं। उसके लिए पहले से जानना पड़ेगा कि सामने वाला आगे कितनी चिप्स डालेगा, और वह उसके हैंड पर, आपके बारे में उसके अंदाज़े पर, और आने वाले कार्ड पर टिका है। इन्हें नज़दीकी फ़ैसलों में पलड़ा झुकाने वाली चीज़ मानिए, मेज़ पर लगाया जाने वाला हिसाब नहीं।
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